नेकी, उत्तम व्यवहार है और गुनाह वह है जो तेरे दिल में खटके और तुझे यह अच्छा ना लगे कि लोग उसे जान लें।तथा वाबिसा बिन माबद- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि मैं अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) के पास आया तो फ़रमायाःक्या तुम नेकी के बारे में पूछने आए हो? मैंने कहाः जी हाँ! तो फ़रमायाः खुद अपने दिल से फ़तवा माँगो। नेकी वह है, जिससे आत्मा संतुष्ट और दिल मुतमइन हो तथा गुनाह वह है जो दिल में खटके और सीने में असमंजस की स्थिति पैदा करे। ( चाहे लोग तुझे फ़तवा दें, चाहे लोग तुझे फ़तवा दें।)
Original Hadith
«البِرُّ حُسْنُ الخُلق، والإثم ما حَاكَ في نفسك وكرهت أن يَطَّلِعَ عليه الناس». (مسلم)